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कुछ अमीर सभ्यताओं की गरीबी चढ़ने को पहाड़ नहीं हर दिन टीला ढूँढते हैं विवशता की आड़ नहीं लक्ष्य लचीला ढूंढते हैं मान की लगाम तन कर हक़ से डेढ़ा ढूँढते हैं शान के ग़ुलाम बन कर आँगन टेढ़ा ढूँढते हैं कोई मीठा दुख नहीं बेमतलब दुख बुला कर भी भोलेपन का सुख नहीं सब संसार से पा कर भी - कालपाठी
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