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नैतिकता और काल

विचारों को जोड़ो मनन कर सांचो इक प्रथा
प्रथा धीरे धीरे जड़ पकड़ होती स्थिर यथा

कई सालों में है अमिट लगता है पर नहीं
भले हो कोई भी दृढ़ नियम से बंधन सही

जुड़ी हो कोई भी जन गुट यशस्वी अटल से
ढली हो कोई भी मन मत व्यवस्था अचल ने

रची श्रद्धा धारा विधि नियम ने निष्कपट ही
चले विद्या शोभा धन बल सभी को सिमटती

कभी नेकी की ले युग इक परीक्षा घन कड़ी
तभी पाई जाये वह सुकृत हो साम्यिक गढ़ी

सदा जाये मानी अगर वह हो नैतिक रची
नहीं तो मैली हो रह न सकती पद्धति बची

- कालपाठी





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