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वर्णन: अधूरी और पूरी अच्छाई


रचना का काल: जनवरी २०२२

कविता का सार
यह कविता का आग्रह है की विश्व जो प्रगति करता है वह अच्छाई के बल पर करता है और लोग यही चाहते हैं की वह भले और नेक हों। लेकिन केवल भले होने की इच्छा पूरा भला करने के लिए पर्याप्त नहीं है। पूरा भला करना उतना सरल नहीं होता है और उसेक लिए नेकी, शौर्य व प्रज्ञता तीनो गुणों को साथ ले कर चलना होता है। यह तीन गुणों का एक दुसरे पर प्रभाव हमारी भले करने की क्षमता को एक नए स्तर पर ले जाता है और कठिन परिस्थितियों में भी भला करने के योग्य बनता है। यह कविता के चरण वर्णिक वृत्त एवं तुकांत हैं।

वर्णिक छंद: शार्दूलविक्रीडित
इसके प्रत्येक चरण में 19 वर्ण होते हैं। क्रम इस प्रकार है- मगण (ऽऽऽ), सगण (।।ऽ), जगण (।ऽ।), सगण (।।ऽ), तगण (ऽऽ।), तगण (ऽऽ।), और अंत में गुरु (ऽ)। यति 12, 7 वर्णों पर होती है।
मात्रा: ३०।

Here is a list of select words with the intended meaning in the poem. Some words may have meanings in addition to those mentioned here:

निर्बोध - unaware, ignorant
उत्थान - advance, progress, rise
मेधावी - judicious
अदोष - faultless
नियमी - law abiding
निर्लेप - unblemished
आचार - conduct
अभ्यास - practice
व्यतीत - spent (as life, time)
विचारशील - thoughtful
समग्र - all, entire
विपदा - distress, adversity
विद्वान - learned
विवाद - quarrel, conflict
स्थायी - stable
प्रगाढ़ - great, profound
मनीषी - wise
सचेत - thinking, mindful
संकल्पना - notion, concept
ध्वजा - flag

Time of composition: January 2022

Essence of poem "Partial and thorough goodness"
This poem affirms that the progress the world makes is on the strength of good and that people want to be good and noble as well. But mere desire to be good is not enough to do complete good. It is not that easy to do complete good and for that one has to bring to bear all the three qualities of goodness, bravery and wisdom. The effect of these three qualities on each other takes our ability to do good to a new level and enables us to do good in difficult situations.



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