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वर्णन: क्यूँ लगता है अच्छाई नहीं फैलती ?


रचना का काल: दिसंबर २०२१

कविता का सार
यह कविता एक प्रश्न पूछती है कि विश्व में अच्छाई पूरी तरह से क्यों फैल नहीं पाई है। कविता अच्छाई में विश्वास दिलाने का प्रयास भी करती है। वह आग्रह करती है कि अच्छाई का और सम्मान हो। कविता यह भी सुझाव देती है कि जो अच्छाई में विश्वास रखते हैं, वे लोग साथ हों तो अच्छाई और गति से फैलेगी। यह कविता के चरण वर्णिक वृत्त एवं तुकांत हैं।

वर्णिक छंद: मालिनी
इसमें दो नगण (।।।, ।।।), एक मगन (ऽऽऽ) तथा दो यगण (।ऽऽ, ।ऽऽ) मिलाकर १५ वर्ण होते हैं। आठ वर्णों पर यति।
मात्रा: २२।

Here is a list of select words with the intended meaning in the poem. Some words may have meanings in addition to those mentioned here:

मृदु - tender
सहज - in natural state or disposition
विनय - courtesy, refinement, humility
दृढ़ - strong, resolute
तप - penance
मनोभाव - disposition
पृथक - separate, isolated
सदृश - similar
साध्य - possible
नाते - alliance
समरसता - harmony
सुप्त - dormant

Time of composition: December 2021

Essence of poem "Why it seems that goodness does not spread?"
This poem asks a question why goodness has not spread completely in the world. The poem also urges one to have belief in goodness. It requests that goodness be respected more. The poem also suggests that if those who believe in goodness get together, then goodness will spread more rapidly.



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